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दीपका नगर पालिका में पार्षदों के साइन बोर्ड पर सवाल, एक वर्ष बाद भी टेंडर नहीं

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दीपका। नगर पालिका परिषद दीपका का एक वर्ष से अधिक का कार्यकाल पूरा हो चुका है, लेकिन अब तक पार्षदों के नाम वाले साइन बोर्ड नहीं लग पाए हैं। इस मुद्दे को लेकर नगर की राजनीति गरमा गई है। जहां अन्य नगरी निकायों और नगर पालिकाओं में पार्षदों के साइन बोर्ड लगाए जा चुके हैं, वहीं दीपका में अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

कांग्रेस पार्षद कमलेश जायसवाल ने इस मामले को उठाते हुए कहा कि परिषद का एक वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, फिर भी साइन बोर्ड नहीं लगाए गए। उन्होंने बताया कि जब इस संबंध में मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) से जानकारी ली गई तो जवाब मिला कि “जल्द ही बोर्ड लग जाएंगे”, लेकिन इसकी कोई निश्चित समय-सीमा नहीं बताई गई।

साथ ही कांग्रेस के पार्षदों के अलावा निर्दलीय पार्षदों ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद उनके नाम के साइन बोर्ड नहीं लगाए गए हैं। उनका कहना है कि यह जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के साथ-साथ प्रशासनिक लापरवाही को भी दर्शाता है।

पार्षदों का आरोप है कि अब तक न तो साइन बोर्ड के लिए टेंडर जारी किया गया है और न ही किसी प्रकार की औपचारिक प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि बोर्ड बिना टेंडर के लगाए जाएंगे या नियमानुसार टेंडर प्रक्रिया के तहत। पार्षदों ने स्पष्ट किया है कि यदि कार्य किया जाता है तो वह पूरी पारदर्शिता और विधिवत टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए।

गौरतलब है कि अभी तक कई स्थानों पर पूर्व पार्षदों के नाम वाले बोर्ड लगे हुए हैं, जिन्हें बदला नहीं गया है। इससे आम नागरिकों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है और वर्तमान जनप्रतिनिधियों की पहचान स्पष्ट नहीं हो पा रही है।

पार्षदों ने मांग की है कि शीघ्र टेंडर प्रक्रिया पूर्ण कर पारदर्शिता के साथ नए साइन बोर्ड लगाए जाएं, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था में स्पष्टता बनी रहे और जनता को सही जानकारी मिल सके।

अब देखना होगा कि नगर पालिका परिषद दीपका इस मामले में कब तक ठोस पहल करती है और पार्षदों की मांग पर अमल होता है।

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