ब्रेकिंग
69 करोड़ की आय, 56 करोड़ का व्यय: तीन माह की देरी से पेश हुआ दीपका नगर पालिका का बजट, विकास से ज्याद... 69 करोड़ की आय, 56 करोड़ का व्यय: तीन माह की देरी से पेश हुआ दीपका नगर पालिका का बजट, विकास से ज्याद... नगरपालिका प्रांगण में 'श्रम वीरों' का सम्मान: शाल-श्रीफल से हुआ स्वागत ज्योति नंद दुबे की उपस्थिति में मोहनपुर में गूंजा ‘गांव चलो, घर चलो’ अभियान, जनसंपर्क कार्यक्रम रहा ... स्थापना दिवस पर भाजपा महिला मोर्चा सक्रिय: संतोषी दीवान ने ज्योति नंद दुबे का किया सम्मान, ‘मेरा बूथ... बालको ने पाली महोत्सव में प्रदर्शित किया सामुदायिक विकास का मॉडल बालको ने 37वें राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह पर चलाया जागरूकता अभियान वेदांता स्किल स्कूल बदल रहा है महिलाओं के साथ देश का भविष्य देवी मंदिरों में श्रृद्धालुओं ने टेका माथा, शोभा यात्रा में उमड़ी भीड़ बालको में जोगी कांग्रेस का खटिया खड़ी आंदोलन रहा असफल

*एसईसीएल गेवरा साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड, गेवरा क्षेत्र के नेहरू शताब्दी चिकित्सालय में कथित मेडिकल बिल अनियमितताओं की उच्च स्तरीय जांच की मांग*

0 620

Urjatimes

एसईसीएल साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल), गेवरा क्षेत्र स्थित नेहरू शताब्दी चिकित्सालय में विगत दो से तीन वर्षों के दौरान मेडिकल प्रतिपूर्ति (Medical Reimbursement) से संबंधित गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। प्राप्त प्राथमिक जानकारी एवं सूत्रों के अनुसार, मेडिकल बिलों के सत्यापन एवं भुगतान प्रक्रिया में व्यापक स्तर पर अनियमितता होने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
आरोप है कि कुछ संबंधित व्यक्तियों द्वारा आपसी मिलीभगत से मेडिकल दस्तावेजों में कथित रूप से छेड़छाड़ (एडिटिंग) कर परिवर्तित प्रतियां प्रस्तुत की गईं और उनके आधार पर भुगतान प्राप्त किया गया। इस कथित प्रकरण में प्रशासनिक स्तर के कुछ अधिकारी, चिकित्सकीय स्टाफ, कर्मचारी वर्ग तथा बाहरी निजी प्रतिष्ठान के बीच समन्वित भूमिका होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सूत्रों के अनुसार, यह कथित अनियमितता एक सीमित अवधि तक नहीं बल्कि दो वर्षों से अधिक समय तक व्यवस्थित रूप से संचालित होती रही हो सकती है। यदि यह तथ्य सत्य पाए जाते हैं, तो इससे कंपनी को करोड़ों रुपये की वित्तीय क्षति होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
यह भी आरोप सामने आया है कि मामले की आंतरिक स्तर पर लीपा-पोती करने के उद्देश्य से अपेक्षाकृत कनिष्ठ कर्मचारियों के स्थानांतरण किए गए, जबकि उच्च पदस्थ अधिकारियों अथवा प्रभावशाली व्यक्तियों की भूमिका की गहन समीक्षा नहीं की गई। हालांकि, स्थानांतरण आदेशों को सीधे इस प्रकरण से जोड़ने की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
सूत्रों के हवाले से यह भी कहा जा रहा है कि यदि पिछले दो से तीन वर्षों की मेडिकल प्रतिपूर्ति फाइलों, बिल सत्यापन प्रक्रिया तथा संबंधित अभिलेखों का स्वतंत्र एवं निष्पक्ष ऑडिट कराया जाए, तो उच्च प्रबंधन स्तर तक जिम्मेदारी निर्धारित हो सकती है। कुछ सूत्रों ने जीएम स्तर तक की प्रशासनिक जवाबदेही की जांच की आवश्यकता पर भी बल दिया है।
उक्त कथित प्रकरण की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए सेंट्रल विजिलेंस कमीशन (CVC), प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) तथा प्रवर्तन निदेशालय (ED) को लिखित आवेदन प्रस्तुत कर स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। आवेदनकर्ता द्वारा अपनी पहचान गोपनीय रखने का अनुरोध किया गया है।
वर्तमान में एसईसीएल प्रबंधन अथवा संबंधित प्राधिकरणों की ओर से कोई आधिकारिक वक्तव्य जारी नहीं किया गया है। मामले में तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करने हेतु विधिवत जांच एवं लेखा परीक्षण (Forensic Audit) की मांग की जा रही है, ताकि सत्य परिस्थितियों का निष्पक्ष निर्धारण किया जा सके तथा दोषी पाए जाने पर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित हो

Leave A Reply

Your email address will not be published.