कोरबा. चैत नवरात्र को लेकर देवी मंदिरों में श्रृद्धालुओं की भीड़ बढ़ गई है। नवरात्र के पहले के दिन सुबह से ही मंदिरों में भक्त उमड़ने लगे थे। शाम तक मंदिर परिसर मनोकामना ज्योति कलश से जगमगा उठे।

इसके पहले गुरुवार को अभिजीत मुहूर्त में घटस्थापना किया गया। नवरात्रि के पहले दिन यानी शुक्ल प्रतिपदा तिथि पर घटस्थापना का विशेष महत्व होता है। घटस्थापना के साथ ही जौ बोने की परंपरा निभाई गई। इस परंपरा के पीछे पौराणिक और धार्मिक मान्यताएं है कि जौ जीवन में सुख, समृद्धि और धनधान्य की प्राप्ति का प्रतीक हैं।

कोरबा शहर में स्थित मां सर्वमंगला मंदिर, भवानी मंदिर, काली मंदिर, कंकाली मंदिर के अलावा कोसगई, चैतुरगढ़ सहित अन्य देवी मंदिरों में नवरात्र के पहले दिन श्रृद्धालओं ने ज्योति कलश को प्रज्वलित किया। इसके के लिए श्रृद्धालु दोपहर 12 बजे से ही मंदिर परिसर में पहुंचने लगे थे। देर शाम तक मां सर्वमंगला का दरबार साढ़े सात हजार से अधिक दीपों से जगमगा उठा। माता रानी का दर्शन करने के लिए भक्त देर रात तक पहुंचते रहे। चैतुरगढ़ और कोसगई के अलावा सभी देवी मंदिरों में भक्तों का तांता लगा हुआ था।

चैत नवरात्र से ही हिन्दू नव वर्ष की शुरूवात होती है। नव वर्ष के अवसर पर शहर में शोभायात्रा का आयोजन किया गया। यात्रा में छत्तीसगढ़ के अलावा विभिन्न राज्यों के संस्कृति झलक दिखाई दी। इस शोभा यात्रा को लेकर युवाओं में काफी उत्साह देखा गया। सुबह से ही युवा एक स्थान पर एकत्र होकर नव वर्ष में आयोजित शोभा यात्रा की तैयारी करते देखे गए। शाम को यह यात्रा सीतामणी से शुुई, जो देर रात कोरबा के ट्रांसपोर्टनगर चौक पर पहुंची। इसमें बड़ी संख्या में शहरवासी शामिल हुए।
