कोरबा. कोयला उद्योग में प्रस्तावित 12वें वेतन समझौते को लेकर परिस्थितियां धीरे-धीरे स्पष्ट हो रही है। नया कानून लागू होने के बाद यह तय हो गया है कि अब कोयला उद्योग में वेतन निर्धारण के लिए जेबीसीसीआई का गठन नहीं होगा। इसकी जगह वार्ताकार परिषद या नेगोसिएशन काउंसिल का गठन किया जाएगा। इस काउंसिल में अधिकतम दो ही यूनियन को शामिल किया जाएगा। काउंसिल में जो यूनियन शामिल होगी उसे निर्वाचन की प्रक्रिया में भाग लेना होगा और कम से कम 20 फीसदी वोट प्राप्त करने होंगे। इससे कम वोट पाने वालों को काउंसिल में शामिल नहीं किया जाएगा और इनसे वेतन निर्धारण मसले पर कोई बातचीत नहीं होगी।
इसकी जानकारी कोयला मजदूर सभा (एचएमएस) के जनरल सेक्रेटरी नाथूलाल पांडे ने दी है। पांडे गुरुवार को संक्षिप्त प्रवास पर कोरबा पहुंचे थे। उन्होंने नए कानून के तहत 4 श्रम संहिता लागू होने से उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों को लेकर चर्चा की और इसका कोयला मजदूरों पर पड़ने वाले असर के संबंध में बताया। जनरल सेक्रेटरी ने कहा कि वर्तमान में कोयला मजदूरों के लिए चुनौतियों से भरा है। केंद्र सरकार ने 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को खत्म कर दिया है। इसके स्थान पर 4 नए श्रम संहिता बनाए गए हैं। ये श्रम संहिता वर्तमान में लागू हो गए हैं। इसी में एक हिस्सा वेतन संहिता, दूसरा औद्योगिक संबंध संहिता, तीसरा सामाजिक संबंध संहिता और चौथा व्यवसायिक सुरक्षा, कार्यदशा संहिता शामिल है। कोयला उद्योग में अभी तक जेबीसीसीआई के जरिए कोयला कामगारों के वेतन का निर्धारण किया जा रहा है। इसमें कोल इंडिया और इसकी अनुषांगिक कंपनियों के अलावा केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के पदाधिकारियों को उनकी सदस्यता के अनुसार प्रतिनिधित्व दिया जाता था। लेकिन सरकार ने नया श्रम कानून लागू होने के बाद इसमें बदलाव कर दिया है।

51 फीसदी अधिक मत प्राप्त होने पर कोयला कंपनी एक ही यूनियन से बातचीत करेगी
अब कोयला उद्योग में वेतन का निर्धारण वार्ताकार परिषद या नेगोसिएशन काउंसिल के जरिए किया जाएगा। इस परिषद में उसी ट्रेड यूनियन को प्रतिनिधित्व मिलेगा, जिसे संबंधित संस्थान में दर्ज कुल श्रमिकों की संख्या का 20 फीसदी कर्मचारियों का समर्थन प्राप्त होगा। उन्होंने बताया कि इससे कम समर्थन मिलने पर संबंधित ट्रेड यूनियन का कोई भी पदाधिकारी वार्ता परिषद में शामिल नहीं होगा, जबकि 20 से 39 फीसदी तक समर्थन मिलने पर एक प्रतिनिधि व 40 से 50 फीसदी मजदूरों का समर्थन मिलने पर दो प्रतिनिधि शामिल होंगे। 51 फीसदी अधिक मत प्राप्त होने पर कोयला कंपनी एक ही यूनियन से बातचीत करेगी। उसे कमेटियों में स्थान देगी। उन्होंने बताया कि कोयला उद्योग में नए वेतन समझौते के लिए काउंसिल का गठन कब होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। लेकिन ट्रेड यूनियन चाहती है कि जल्द से जल्द काउंसिल गठन के कार्य को पूरा किया जाए।
चर्चा के दौरान जनरल सेक्रेटरी नाथूलाल पांडे के अलावा एचएमएस एसईसीएल के कार्यवाहक अध्यक्ष सह कोरबा, गेवरा, दीपका और कुसमुंडा एरिया के प्रभारी केदारनाथ अग्रवाल, कोरबा क्षेत्र के महामंत्री सुरेंद्र मिश्रा, कोषाध्यक्ष रोशन कुमार सहित अन्य पदाधिकारी व सदस्य उपस्थित थे।
सदस्यता सत्यापन की प्रक्रिया शुरू, आगे इसके आधार पर ही निर्णय, पंजीकृत संगठन ले सकेंगे हिस्सा
एचएमएस के जनरल सेक्रेटरी नाथूलाल पांडे ने बताया कि वर्तमान में कोल इंडिया की सहयोगी कंपनियों में सदस्यता सत्यापन का कार्य चल रहा है। कामगार किसी भी ट्रेड यूनियन का सदस्य हो सकता है लेकिन वह एक से अधिक यूनियन में शामिल नहीं हो सकता। इसके आधार पर ट्रेड यूनियनों में सदस्यों की संख्या तय होगी। 25 सितंबर तक सदस्यता सत्यापन का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद कोयला कंपनी की ओर से वोटिंग कराकर यह जाना जाएगा कि किस ट्रेड यूनियन को कितना फीसदी वोट प्राप्त हो रहा है। इसी के आधार पर नेगोसिएशन काउंसिल में जाने वाले ट्रेड यूनियन व उसके सदस्य तय होंगे। पांडे ने बताया कि कोल इंडिया से जुड़ी बड़ी कोयला कंपनियों में स्थानीय मसलों पर चर्चा के लिए एकल, दोहरी व त्रिस्तरीय समितियों का भी गठन किया जाएगा। एसईसीएल एक बड़ी कंपनी है इसलिए इसमें त्रिस्तरीय समिति गठित होगी।